बोरॉन (Boron) पौधे को बहुत थोड़ी मात्रा में चाहिए, लेकिन फूल बनने, परागण और फल बनने में इसकी भूमिका बहुत बड़ी है। इसकी कमी का असर सीधे पैदावार पर पड़ता है।
बोरॉन की कमी के लक्षण
फूल और छोटे फल झड़ना, फलों का फटना या टेढ़ा होना, नई कोंपलों का सूखना, और फूलगोभी में तना खोखला या भूरा होना। दलहन और तिलहन में फलियां कम बनती हैं।
किन फसलों में ज़्यादा ध्यान दें
फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, मिर्च, चना, मूंगफली, सरसों, सूरजमुखी, कपास और फलदार पेड़ (जैसे आम, अमरूद, नींबू) बोरॉन के प्रति संवेदनशील होते हैं। रेतीली मिट्टी और ज़्यादा बारिश वाले क्षेत्रों में कमी ज़्यादा दिखती है।
कब और कितना दें (लेबल के अनुसार)
फूल आने से पहले और फूल आते समय छिड़काव सबसे असरदार रहता है।
Kheti Boron-20 (Boron 20%): छिड़काव 1-2 ग्राम प्रति लीटर पानी; मिट्टी में 1-2 किलो प्रति एकड़।
Kheti Boron-L (Boron 10% तरल): छिड़काव 2-2.5 मिली प्रति लीटर पानी, पत्तियों के दोनों तरफ समान रूप से।
Kheti Boron-14.5 (Boron 14.5%): मिट्टी में 2-5 किलो प्रति एकड़; छिड़काव 0.5-1 ग्राम प्रति लीटर पानी।
ज़रूरी सावधानी
बोरॉन की ज़रूरत और ज़्यादा मात्रा (विषाक्तता) के बीच का अंतर बहुत कम होता है। इसलिए लेबल से ज़्यादा मात्रा बिल्कुल न डालें और एक ही मौसम में बार-बार मिट्टी में न डालें।
ध्यान रखें: किसी भी उत्पाद का प्रयोग उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करें और अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बोरॉन का छिड़काव कब करना चाहिए?
फूल आने से ठीक पहले और फूल आने के समय छिड़काव सबसे ज़्यादा फायदेमंद रहता है। मात्रा उत्पाद के लेबल के अनुसार रखें।
क्या बोरॉन ज़्यादा डालने से नुकसान हो सकता है?
हां। बोरॉन की ज़्यादा मात्रा पौधों के लिए ज़हरीली हो सकती है, इसलिए लेबल पर लिखी मात्रा से ज़्यादा न डालें।
