हर खेत की मिट्टी अलग होती है। किसी में जिंक कम होता है, किसी में सल्फर, तो किसी में जैविक कार्बन। मिट्टी की जांच से पता चलता है कि आपके खेत को असल में किस चीज़ की ज़रूरत है — इससे बेकार खाद पर खर्च बचता है और पैदावार बढ़ती है।
जांच कब कराएं
फसल कटने के बाद और अगली बुवाई से पहले, जब खेत में खड़ी फसल न हो। हर 2-3 साल में एक बार जांच कराना अच्छा रहता है।
सैंपल लेने का सही तरीका
1. खेत में टेढ़े-मेढ़े (ज़िग-ज़ैग) रास्ते पर 8-10 जगह चुनें।
2. हर जगह ऊपर की घास-पत्ती हटाकर खुरपी या फावड़े से V आकार का गड्ढा बनाएं और उसकी एक तरफ से लगभग 15 सेंटीमीटर (6 इंच) गहराई तक मिट्टी की पतली परत लें।
3. सभी जगह की मिट्टी को एक साफ बाल्टी या बोरी पर मिलाएं और छाया में सुखाएं।
4. मिली हुई मिट्टी को चार हिस्सों में बांटकर आमने-सामने के दो हिस्से हटाते जाएं, जब तक लगभग आधा किलो मिट्टी न बचे।
5. साफ थैली में रखकर उस पर किसान का नाम, खेत का नंबर, गाँव और तारीख लिखें।
किन जगहों से सैंपल न लें
मेड़, पेड़ के नीचे, गोबर या खाद के ढेर वाली जगह, पानी भरने वाली जगह और सिंचाई नाली के पास से सैंपल न लें।
जांच कहाँ कराएं
अपने ज़िले की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क करें। सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के तहत भी जांच की सुविधा मिलती है।
रिपोर्ट के बाद क्या करें
रिपोर्ट में जिस पोषक तत्व की कमी दिखे, वही दें। जिंक की कमी में Kheti Zinc-21, सल्फर की कमी में Kheti Sulphur-90, कई सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी में Micro Power, और कम जैविक कार्बन में Kheti Vermicompost जैसे विकल्प हैं — मात्रा रिपोर्ट और लेबल के अनुसार रखें।
ध्यान रखें: किसी भी उत्पाद का प्रयोग उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करें और अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ से सलाह ज़रूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मिट्टी का सैंपल कितनी गहराई से लेना चाहिए?
ज़्यादातर फसलों के लिए लगभग 15 सेंटीमीटर (6 इंच) गहराई तक। खेत में 8-10 जगह से मिट्टी लेकर मिलाएं।
मिट्टी की जांच कहाँ होती है?
ज़िले की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या कृषि विभाग के कार्यालय में। सॉयल हेल्थ कार्ड योजना के तहत भी जांच होती है।
