रबी में गेहूं की बुवाई से पहले जैविक बीज उपचार एक सस्ता और आसान तरीका है, जिससे मिट्टी में पहले से मौजूद पोषक तत्व पौधों तक बेहतर पहुँचते हैं और शुरुआती बढ़वार अच्छी होती है। यह रासायनिक खाद की जगह नहीं लेता, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करता है।
कौन-सा जीवाणु क्या करता है?
एज़ोटोबैक्टर — हवा से नाइट्रोजन लेकर पौधों को देने में मदद करता है।
PSB (फॉस्फेट घोलक जीवाणु) — मिट्टी में बंधे फॉस्फोरस को घोलकर पौधों के लिए उपलब्ध कराता है।
KMB (पोटाश गतिशील जीवाणु) — मिट्टी के पोटाश को पौधों तक पहुँचाने में मदद करता है।
जिंक घोलक जीवाणु (ZSB) — मिट्टी में मौजूद जिंक को घुलनशील बनाता है; गेहूं में जिंक की कमी वाले खेतों में उपयोगी।
मात्रा (लेबल के अनुसार)
Kheti Azotobacter: बीज उपचार 10 ग्राम प्रति किलो बीज; मिट्टी में 2-5 किलो प्रति एकड़ कूंड़ में या जड़ों के पास।
Kheti PSB: बीज उपचार 10 ग्राम प्रति किलो बीज; मिट्टी में 2-5 किलो प्रति एकड़।
Kheti KMB: बीज उपचार 10 ग्राम प्रति किलो बीज; मिट्टी में 2-5 किलो प्रति एकड़।
Kheti Bio Zinc (ZSB): बीज उपचार 20-25 ग्राम प्रति किलो बीज; मिट्टी में 2-5 किलो प्रति एकड़।
Kheti Consort (Bio NPK कंसोर्टिया): मिट्टी में 4-10 किलो प्रति एकड़; 1 भाग उत्पाद को 10-20 भाग गोबर खाद/कम्पोस्ट में मिलाकर खेत में डालें।
बीज उपचार का सही तरीका
1. थोड़े पानी में गुड़ घोलकर ठंडा कर लें। 2. उसमें लेबल के अनुसार जैव उर्वरक मिलाएं। 3. बीज पर यह घोल अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर दाने पर परत चढ़ जाए। 4. बीज को छाया में सुखाएं और उसी दिन बुवाई कर दें।
ध्यान रखने वाली बातें
अगर बीज पर फफूंदनाशक दवा लगानी है तो पहले दवा लगाएं, फिर जैव उर्वरक — या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लें। जैव उर्वरक को धूप और गर्मी से बचाकर रखें और एक्सपायरी से पहले इस्तेमाल करें। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या एक साथ कई जैव उर्वरक से बीज उपचार कर सकते हैं?
हाँ, एज़ोटोबैक्टर, PSB और KMB आम तौर पर साथ में इस्तेमाल होते हैं, या कंसोर्टिया (Bio NPK) एक ही उत्पाद में तीनों देता है। मात्रा हर उत्पाद के लेबल के अनुसार रखें।
जैव बीज उपचार के बाद बीज कितनी देर में बोएं?
बीज को छाया में सुखाकर उसी दिन बुवाई कर देना सबसे अच्छा है।
क्या जैव उर्वरक से रासायनिक खाद बंद कर सकते हैं?
नहीं, जैव उर्वरक खाद का पूरक हैं। मिट्टी जांच के अनुसार संतुलित खाद देते रहें।
